सामर्थ्य झोंक दो..फिर देखो।

मन का ये अंधियारा रस्ता रौशन कैसे होता है कड़ी धूप में प्यासा कोई मन का ये अंधियारा रास्ता,  रौशन कैसे होता है..  खड़ी धूप में प्यासा कोई,  कैसे राह संजोता है..  कैसे उठते तूफानों को,  धरती थामा करती है..  सामर्थ्य झोंक दो.. फिर देखो।  घिसट घिसटकर चलने वाला,  लक्ष्य मे…

सच लिखना लेखकों लेकिन..|Every Writer's Responsibility |Best Inspirational Poem

सच लिखना लेखकों,  लेकिन खिला देना फूल  रेत की मिट्टी में..  बो देना उम्मीद,  आखिरी पंक्ति में..  जीत न भी लिख पाओ तो,  हौसलों को हारने मत देना।  लिखना सच.. लिखना कि पेड़ सूखे हैं छाँव नही है, पतझड़ है लेकिन कभी  उसे गिरने मत देना.. लिखना कि पत्तियाँ हरी होंगी आँधियाँ…

भले यह रण आखिरी हो, युग उसे अंकित रखेगा। Poem on Veer Abhimanyu |Sandeep Dwivedi

महाभारत की कथा में पात्र था अद्भुत धरा में बचपन अभी छूटा नही था पर खड़ा वीरों की सभा में भले यह रण आखिरी हो जग मुझे अंकित रखेगा सीख ये संसार ले ले युद्ध भी आकार ले ले हाथ छोटे ही सही यदि हौसलों का भार ले ले कौन योद्धा टिक सकेगा कौन मर कर मर सकेगा बिगुल वीरों के लिए है …

Best Poem on Maharathi Karn |बैकुंठ धाम को त्याग कर्ण, बैकुंठ नाथ को जीत लिया। Kavi Sandeep Dwivedi

जब कर्ण की उठती है चर्चा तब कृष्ण भी दोषी दिखते हैं लेकिन यह बड़ी योजना थी चलिए उस पक्ष से मिलते हैं क्यों सारी शिक्षा व्यर्थ रही न दान पुण्य ने साथ दिया न्याय को लड़ते स्वयं कृष्ण क्यों कर्ण दशा पर मौन लिया एक चरित्र इस तरह रचना था संदेश जगत में रखना था सागर की ऊँची…

बिनु हरिकृपा मिलहिं नहि संता | मेरी प्रथम पुस्तक निर्माण के प्रमुख स्तंभ।

मैं  यह चौपाई अक्सर दोहराता हूँ..  अब मोहि भा भरोस हनुमंता।  बिनु हरिकृपा मिलहिं नहि संता।। आज बड़ा सौभाग्य का दिन रहा कि पुस्तक उन तक पहुंचाया।। जिनका मेरी पुस्तक में ही नहीं जीवन के कई पक्षों में भी मार्गदर्शन मिलता रहा.. चौहान सर का सानिध्य मिलने की घटना कुछ इस तरह…