भले यह रण आखिरी हो, युग उसे अंकित रखेगा। Poem on Veer Abhimanyu |Sandeep Dwivedi

महाभारत की कथा में पात्र था अद्भुत धरा में बचपन अभी छूटा नही था पर खड़ा वीरों की सभा में भले यह रण आखिरी हो जग मुझे अंकित रखेगा सीख ये संसार ले ले युद्ध भी आकार ले ले हाथ छोटे ही सही यदि हौसलों का भार ले ले कौन योद्धा टिक सकेगा कौन मर कर मर सकेगा बिगुल वीरों के लिए है …

Best Poem on Maharathi Karn |बैकुंठ धाम को त्याग कर्ण, बैकुंठ नाथ को जीत लिया। Kavi Sandeep Dwivedi

जब कर्ण की उठती है चर्चा तब कृष्ण भी दोषी दिखते हैं लेकिन यह बड़ी योजना थी चलिए उस पक्ष से मिलते हैं क्यों सारी शिक्षा व्यर्थ रही न दान पुण्य ने साथ दिया न्याय को लड़ते स्वयं कृष्ण क्यों कर्ण दशा पर मौन लिया एक चरित्र इस तरह रचना था संदेश जगत में रखना था सागर की ऊँची…

बिनु हरिकृपा मिलहिं नहि संता | मेरी प्रथम पुस्तक निर्माण के प्रमुख स्तंभ।

मैं  यह चौपाई अक्सर दोहराता हूँ..  अब मोहि भा भरोस हनुमंता।  बिनु हरिकृपा मिलहिं नहि संता।। आज बड़ा सौभाग्य का दिन रहा कि पुस्तक उन तक पहुंचाया।। जिनका मेरी पुस्तक में ही नहीं जीवन के कई पक्षों में भी मार्गदर्शन मिलता रहा.. चौहान सर का सानिध्य मिलने की घटना कुछ इस तरह…

दिलों वाली होली |Dilon wali Holi| Holi Special Poem |Kavi Sandeep Dwivedi

दिलों वाली होली  ये होली मात्रा रंगों के फुहार की नहीं , शब्दों के फुहार की भी है.. शब्दों में अपनापन घोलें  और पहुंचा दें हर किसी तक  अभी और इसी वक़्त।।। होली की आप सबको  हार्दिक शुभकामनाएं  आपका सारा जीवन सुनहरे रंगों से भरा रहे.. भरकर रंग बिरंगा पानी दिल में लेकर प्र…

वाह रे! PSC | lines about pain and courage of PSC Aspirants |Kavi Sandeep Dwivedi

वाह रे! PSC लाखों अभ्यर्थी सिविल सर्विस (psc)का सपना लिए दिन-रात लगन से जुटे रहते हैं। सबकी अपनी अपनी परिस्थितियाँ हैं पर..अब सपना है तो है।। सब कुछ त्याग कर, सब कुछ सहकर तैयारी करना आसान बात नही है और ये परीक्षाएं आसान होनी भी नही चाहिए। बड़ी जिम्मेदारि…