(Workshop) कैसे सोचें ,कैसे लिखें और कैसे पहुँचाएं दुनिया तक ? - मैं कुछ मदद करूं ? click detail

नीचे लिंक पर जाएं   नमस्कार , पिछले कुछ समय से आप सबकी ओर से  ये  संदेश आ रहे हैं  कि  ... हम लिखें कैसे ? कैसे शुरुआत करें ?कैसे विषय चुनें ? ..  मुझे लगता है कि मैं अच्छा नही लिख पा रहा..  --मुझमें लिखने का हुनर नही है...   .. हमारे विचार शब्दों के रूप में हमारी टेबल…

तुम्हें छोड़ना कितना मुश्किल : kavi sandeep dwivedi's love poetry

आज अकेले राह चला तो  दिल में बढ़ते भार से जाना  तुम्हें छोड़ना कितना मुश्किल  हाथ हमआर भूल चुके हैं  हाथों को बिन थामे चलना  दुनिया तो एकाकीपन है  दुनिया तेरे साथ टहलना  तेरी याद में राहें भटका  रहा नहीं जब अपने बस का  मन के सूनेपन से जाना  तुम्हें छोड़ना कितना मुश्किल  त…

सीखे जग यह भी अर्जुन से, क्या चुना और छोड़ा जाए | Inspirational Poem | Kavi Sandeep Dwivedi

रणभूमि मध्य इस योद्धा के सम्मुख कौन बिना भय था कुरुवंशी था वह महारथी चलता लिए सदा जय था आज चुना उस योद्धा को जिसको केशव चुनने आए हर कोई के संदेश कि क्यों अर्जुन की चर्चा की जाए।। लगन, अनूठी जिज्ञासा गुरुभक्ति में दिन दिन बीते लक्ष्य साधना कैसे है …

हिम्मत भरा साल | New Year Poem 2022 | Kavi Sandeep Dwivedi

उम्मीदों भरी आंच से सेन्को नया साल।  नयी नज़रों नये अंदाज़ से देखो नया साल।  भुलाओ क्या बुरा हुआ क्या खोया तुमने हुआ जो हुआ इसको बनाओ हिम्मत भरा साल।  खोया तो है दोस्त तुमने भी और हमने भी रोया भी है खूब तुमने भी और हमने भी।  लेकिन नये सवेरों को सजा न दो भला इनका क्या द…

Kyon Vachan Bhishm Ne Na Tode ? : poem on bhishm : Kavi Sandeep Dwivedi

जब कथा करवटें लेती हो संदेश युद्ध का देती हो अंधियारी जब भीतर की हर उजियारा हर लेती हो ऐसे में दीपक रखने वाले क्यों अपने व्रत से ना डोले परिवार ने तोड़ी सीमाएं क्यों वचन भीष्म ने न तोड़े।  धर्म की रक्षा करने वाला अधर्म देख क्या सकता था?  अजर सिंह के सम्मुख कोई  इस तर…