अनुराग दांगी जी और संदीप शर्मा जी से भोपाल में मुलाकात।।meet up with a speaker and a writer..

मेरे पास  मैसेंजर पर एक मैसेज आया..
हेलो संदीप जी,
कैसे हैं आप ?आपके शहर आया हूँ...

ये अनुराग दांगी जी का मैसेज था..दांगी जी के कामों से मैं फेसबुक के माध्यम से परिचित हुआ..और उनके सामाजिक उद्देश्यों से बहुत प्रभावित हुआ..
उनका कहना ये था कि हम आपकी कविता कहानियों से प्रभावित हैं ..उन्हें लगता है कहीं न कहीं कुछ कहानियां उनको भी दर्शाती हैं..पता नही लेकिन मुद्दे की बात ये हैं कि मैं उनसे और उनके सहयोगी मोटिवेशनल स्पीकर शशिश तिवारी जी काफी से प्रभावित था..
                              अब चूँकि वो पटना से  भोपाल आये थे कोई सेमीनार अटेंड करने..उन्हें शायद यह पता था कि मैं भोपाल में हूँ..लेकिन उस समय मैं इंदौर में था..
हमें लगा हमारे प्रदेश में वो आये पटना से भोपाल..तब मैं तो इंदौर से भोपाल आ ही सकता हूँ..ह ह ह
उत्साहित था..
18 मार्च 2019 को मैं भोपाल आया..मेरे आने में देरी होने से उन्हें थोडा इंतजार करना पड़ गया...
हलाकि तब तक मैं उनके स्वागत के लिए मैनेज करने में व्यस्त था..और ये मैं उन्हें बताना नही चाहता था..
ये उनका भोपाल तरफ एक लम्बे समय करीब 7 साल बाद आना हुआ था ...
मैं और मेरे जीजा जी उन्हें रिसीव करने गये..
तस्वीरें साझा कर रहा हूँ...



और जब उनसे मिला तो लगा कोई नयी मुलाकात नही थी..बड़ी सहज मुलाकात थी..
जिम्मेदारी थोड़ी मेरी बड़ी थी क्यूंकि वो हमारे मेहमान थे..और होना भी चाहिए..
भोपाल के अतिशय होटल में हमने उनके साथ डिनर करने का इंतजाम किया.. डिनर के पहले करीब आधे पौने घंटे काफी बाते हुयी..साहित्य की बात हुयी..वो मेरी और हम उनकी तारीफ कर रहे थे..
कुछ तारीफें बातों का सिलसिला बढ़ाती हैं..और ऐसा ही हो रहा था..
              हमने डिनर किया..डिनर करीब 45 मिनट तक रहा..नही.. नही हमने खाना ज्यादा नही खाया..बस बातें ही न रोकी जा रही थी ..न ख़त्म हो रही थी ..ह ह ह
        एक शख्सियत और थी उनके साथ में जो डिनर टाइम में साथ नही थे..संदीप शर्मा जी
हलाकि मुझसे छोटा है करीब 8 साल..लेकिन लेखक गज़ब का है..शब्दों से दुनिया घुमाता है.. बड़े बड़े पहलुओं को बड़े सिंपल से एक्सप्लेन करता है...
उसका गेटअप भी बड़ा प्रभावपूर्ण था..बड़ी गंभीरता से बात करता है..आपको पढना चाहिए एक बार इसके लेखन को...वो कोई नावेल भी लिख रहा है..मैं सबसे पहला पाठक बनना चाहूँगा.
       तो ये आखिर में आया मैं गले मिलने के लिए हाथ बढ़ाया उसने पैर छुए... उसे हॉट एंड सोरे सूप ऑफर किया.मुस्कुराकर हाँ कर दिया...और फिर वहीँ करीब २ घंटे से ज्यादा हम तीनो और मेरे जीजा जी गपशप करते रहे..

पल तेजी से बीत रहा था..और आखिर आखिर में  होटल में कुछ फिर से फोटो शोटो हुयी..
फिर उन्हें जहाँ उन्होंने स्टे किया था वहां छोड़ने गया..बीच में ही सबने कुछ फ्लेवर सोडा शिकंजी पिए ..मुझे तो फ्लेवर पता ही नही था..मेरे जीजा जी इसमें बड़ा अनुभव रखते हैं..
फिर आखिर में जब इनके स्टे होटल में गया यकीं ही नही हुआ वहाँ इतने लोग पहचानते थे  मुझे..
एक ने जिस ताकत से हाथ मिलाया था..मुझे लगा मैं एक हाथ से हाथ धो बैठा हूँ ..ह ह ह ..बडे व्यावहारिक थे..

फिर वहाँ  कई लोग इकठ्ठा हो गये..रूम के भीतर जा ही नही पाया..
करीब एक घंटा ये मिलने का और फोटो खीचने का सिलसिला जारी रहा..
हम, दांगी जी, संदीप और सारे  लोग इस मोमेंट को जी रहे थे..
करीब 11 बज गये..जाना था
बड़ा भावनात्मक माहौल हो गया था ..मैं दांगी जी से गले मिला सबसे मिला और फिर वहाँ से निकला.
क्यूंकि अगले दिन हमें वापस इंदौर निकलना था..
मेरी कविताओं को इतना सबका प्यार मिला यही मेरी उपलब्धि थी..
धन्यवाद दांगी जी ,धन्यवाद शर्मा जी..धन्यवाद् वो सारे लोग जिनसे वहाँ मुलाकात हुयी..
ढेर सारी शुभकामनाएं आपको..

हमेशा याद रहेगी ये मुलाकात..लेकिन आते रहियेगा..हमेशा
संदीप आपकी नावेल का हम इंतजार कर  रहे हैं ....
कुछ और फोटो शेयर कर  रहा हूँ..





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