Monday, August 5, 2019

विश्व ने राम को जाने क्या क्या कहा....सीता कहती रही राम ही सत्य थे..: Kavi Sandeep Dwivedi Poem

आइये स्वागत है..
कविता सुनें भी पढ़ें भी ..


सीता कहती रही राम ही सत्य थे ...

कब उन्होंने कहा
मैं चलूँ साथ में
पथ ये वनवास का
मैंने ही था चुना..
वो गिनाते रहे
राह की मुश्किलें
प्रेम थे वो मेरे
प्रेम मैंने चुना...

लांघी थी मैंने ही
सीमा की देहरी
दोष किसका था ?
मेरा या श्री राम का..
राम न जाते
लक्ष्मण को न भेजती ..
सब मेरे ही किये का
ये परिणाम था..
विश्व ने राम को जाने क्या क्या कहा
सीता कहती रही राम ही सत्य थे..

जिसको पाने को
दर दर भटकते रहे
प्रेम के आगे सागर भी
न टिक सका
वो भला ऐसे कैसे
मुझे त्यागेंगे
एक क्षण भी मेरे बिन
जो न रह सका..
विश्व ने राम को जाने क्या क्या कहा
सीता कहती रही राम ही सत्य थे..


प्रेम जो अपना वो
अग्नि पर धर दिए
उनका उपकार था ये
मेरे लिए
पीढियां मुझको कुछ
न कहें इसलिए
सारे अपयश उन्होंने
स्वयं ले लिए..
 विश्व ने राम को जाने क्या क्या कहा
सीता कहती रही राम ही सत्य थे..

न श्री राम की
एक तरफ थी प्रजा
एक तरफ जानकी
वो तडपता ह्रदय भी
न तुम पढ़ सके
गढ़ ली थी परत
जिसमे पाषाण की..
विश्व ने राम को जाने क्या क्या कहा
सीता कहती रही राम ही सत्य थे..

कह लो कहना हो जो
जो कह सको राम को
ज्ञात हो ऐसा राजा
नही पाओगे
धर्म को थमते लुट गया
जो स्वयं
ऐसे त्यागी तपी को तरस जाओगे..
विश्व ने राम को जाने क्या क्या कहा
सीता कहती रही राम ही सत्य थे..

  -kavi sandeep dwivedi