मैं किसी की सुनता नही हूँ..|| Never Ignore Dream..|| Kavi Sandeep Dwivedi



मैं किसी की सुनता नही हूँ...

तुम हर तरफ कांटे बिछा दो
कोई बड़ी अड़चन लगा दो
जो राह मैने थाम ली
बिन तय किये रुकता नही हूँ...
सपनों की जब बात हो
मैं किसी की सुनता नही हूँ..



मेरा हारना तय है
तुम्हारा जीतना
ऊंचाइयां तेरी हैं
मेरा टूटना
लेकिन एक बात भी
मेरे लिए मत भूलना
खेले बिना ही खेल में 
हथियार में रखता नही हूँ..
मैं किसी की सुनता नही हूँ..



सच है पूरी उम्र भर 
हासिल नही कुछ भी किया है
पर सुना है पाता वही है 
जिसने सबकुछ खो दिया है
हारने के डर न कर
क्या हारना क्या जीतना
मंजिल मुझे मिल जाएगी ही 
मैं अगर थमता नही हूँ...



किस्मत कहां तक साथ देगी
तुम अगर बैठे रहोगे
लिखा था जो मिल गया
बेवजह रटते रहोगे
जो नही देखा कोई 
उन कागजों को तुम सम्भालो
रास्ते में ढालता हूँ
मैं रास्ते चुनता नही हूँ..
मैं किसी की सुनता नही हूँ...

-कवि संदीप द्विवेदी

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