सुना है चर्चा दियों का, आंधियों की जुबानी। try to be like a lamp |Best Inspirational Poem |Kavi Sandeep Dwivedi

🙏🙏।।आत्मदीपो भव्।। 🙏🙏
Be Your own Light


प्रकाश खुशी का प्रतीक है।। ऊर्जा का प्रतीक है।
स्वयं की कमियों पर काम करते हुए स्वयं को बेहतर करने की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है।
दीपक को प्रकाश का एक बहुत छोटा स्त्रोत माना जाता है।
लेकिन इस दीपक के जलने को लेकर कई प्रेरक संदेश निकल कर आते हैं।
जो हमारे भीतर हिम्मत भरते हैं। हौसला देते हैं।
कोई भी प्रेरक कविता कहानी व्याख्यान...बिना दीपक की चर्चा के अधूरी लगती है।
और इस क्रम में दीपावली। जिसमें दीप जलाये जाते हैं। प्रभु श्री राम के स्वागत की प्रथा है।।।
और आज दीपावली के अवसर पर एक ऐसा ही छोटा सा प्रयास रखना चाहता हूँ।
जिसमें दीप का हुनर सीखने को प्रेरित करती है।
आशा है आपको पसंद आयेगी।
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दिए के हाथों टिकी 

जैसे उजालों की कहानी

खूबियां चुनता हुआ

रिश्ता है जैसे धूप पानी। 


हौसले झुके कब हैं 

इन दियों के

सुना चर्चा है दियों का

आँधियों की जुबानी। 


रिश्तों की ये डोर

ये दूरियाँ कब तोड़ पायीं

प्यार की पतवार बोलो

मुश्किलें कब रोक पायीं


ना रुके हैं ये कदम

अड़चनों के सामने

हाथ उनके है नही

मेरे सपनों की कहानी। 


जीत कर आये हैं हम

हार हमने नही मानी

दीप की ही तरह अपनी

हौसलों की ये कहानी। 


वक़्त के बस में नही है

हमको पीछे छोड़ भागे

घर हमारा बना है

मुश्किलों से कहीं आगे।। 

Kavi Sandeep Dwivedi

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