Thursday, January 17, 2019

इस बार रण कुछ और होगा..: Pocket Poem For Students :Kavi Sandeep Dwivedi : Is Baar Ran Kuchh Aur Hoga..





Pocket Poem For Students..
 इस बार रण कुछ और होगा 

था टूटकर बिखरा हुआ 
हारा हुआ ,सोया हुआ 
एक आग सहसा जल उठी 
चीखकर यह कह उठी 
इस बार रण कुछ और होगा..

कब तक रहूँ ,कब तक सहूँ 
हूँ मिट गया,कितना मिटूँ
अब मिट्टियाँ फिर से ढलेंगी
इस बार गढ़ कुछ और होगा 
इस बार रण कुछ और होगा..

उठ खडा हूँ ध्येय पथ पर 
दृष्टि पैनी कर लिया हूँ 
अब छल नही कोई छलेगा 
'कर्ण 'अब कुछ और होगा ..
इस बार रण कुछ और होगा..

अब नही परवाह कोई 
कुछ छूटता है छूट जाये 
अब नही चूकुंगा मैं 
ये वार अब कुछ और होगा 
इस बार रण कुछ और होगा..

                              - संदीप द्विवेदी 




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