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मिलना था जो नहीं मिल वो 
जो चलना था नही चला वो 
माना सपने चूर हो गए 
तुम मिटने को मजबूर हो गए 
लेकिन हार को जीवन भर 
ढोने से कुछ होता है क्या 
नहीं हुआ तो हो जाएगा 
रोने से कुछ होता है क्या?

नाम एक गिनवाओ मुझको 
आसानी से मिल हो जिसको 
जीत का अपना ढंग रहा है 
पथ मुश्किल के संग रहा है
अब है मुश्किल तो है मुश्किल 
यूं डरने से कुछ होता है क्या 
 नहीं हुआ तो हो जाएगा 
रोने से कुछ होता है क्या?


दुनिया तुमको क्या बोलेगी 
जो बोलेगी सो बोलेगी 
तुमको तो राह पता है न 
हार जीत हर पल है न 
तुम जो हो तुमको मालूम है 
कहने से कुछ होता है क्या 
नहीं हुआ तो हो जाएगा 
रोने से कुछ होता है क्या?

पानी बरस बीज लगाया 
फिर एक दिन ऐसा भी आया 
सूख गया जो कुछ बोया था 
कितने दिन वो ना  सोया था 
लेकिन खेत न बंजर छोड़े 
ऐसा साहस देखा है क्या ?
नहीं हुआ तो हो जाएगा 
रोने से कुछ होता है क्या?

     - संदीप द्विवेदी

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