Thursday, December 31, 2020

2021 "मैं वो जहाज था जो भूल गया था..वो पानी में है.." चार प्रेरक अनुभव जो 2020 ने 2021 को बताया |Four Best Messege by 2020 to 2021

LIFE LESSON BY 2020 TO 2021


2020 ने तो दुनिया हिला दी ...लगा  जैसे यह साल एक बड़ी जहाज में बीता जो एक बड़े तूफ़ान में फंस गयी ..सब अस्त व्यस्त.. 
ऐसे में किनारे पहुँचते हुए 
2020 ने एक जहाज बनकर हमें वो बातें याद दिलायी हैं जिससे हम सब किनारे पहुँच सके ..
तो आइये पढ़ते हैं वो चार सीखें, जो हम सबको आने वाले साल ही नही..हमेशा ही काम आयेंगी..

1. तूफ़ान कभी भी आ सकता है ...
"मैं वो जहाज था जो ये भूल गया था कि वो पानी में है ..पानी में लहरें उठती हैं..कभी भी उठ सकती हैं ...
और ये तूफ़ान जिसने मुझे परेशान कर दिया शायद किसी को अंदाज़ा नही था ...जहाज के कई हिस्से टूट गये... पर मैं ये समझ गया.. कभी भी ऐसे भंवर आ सकते हैं ..जहाज मजबूत रखा जाय..बड़ी मुश्किल से बचा हूँ जितना बचा हूँ ...और इसलिए बचा हूँ कि कुछ लोग थे.. जो तैयार भी थे लड़ने के लिए.. जूझने के लिए..शायद आने वाला साल...आने वाला जहाज  मेरी इस बात से कोई सीख ले..." 

2.मदद करते रहना  
"शायद इस मामले में मैं इतना ख़राब नही था ...ऐसे लोग अधिक थे जिनसे जहाज का बैलेंस बना रहा...सौभाग्यशाली रहा कि लोगों ने जहाज को अधिक नही उलझाया..और कुछ जो हुई भी उसका अधिक फर्क ना पड़ा..
लोगों ने लोगों को समझा..लोगों ने मदद की..अपने हुनर से..अपनेपन के एहसास से ..अपने पास जो भी था उससे ...यदि लोग उलझते तो पता नही क्या होता...सबने इस उमड़े तूफ़ान में एक दूसरे की मदद की...
और लोगों में आपस में जहां- जहां प्रेम रहा... वहां तूफ़ान कुछ न कर सका..  तुमने देखा न.."

3.सीखते रहना यार.. 
अब मेरा सबकुछ अब तुममे जा रहा है ..मैं अब किनारे में हूँ लेकिन मैंने बड़ा तूफ़ान देखा है ..और ये सीखा है कि हमेशा सीखते रहना है नया नया..मेरा जहाज तूफ़ान में फंस गया था ..लेकिन लोगों ने बड़ी कुशलता से नाव को सही दिशा दी...संभालने के लिए बढ़िया जतन किया ..नुकसान तो हुआ..पर हम नष्ट नही हुए..और शायद इन्हीं  नयी नयी तरकीबों और उनके कुशल प्रयोग के ही कारण..

 4.धीरज धरना.. 
"पता नही मैं कैसा हो जाता दोस्त, यदि ये बात मुझमें न होती ...वो तूफ़ान का दृश्य बहुत भयावह था ..किनारे तक तुम देख रहे हो न..मैं जूझ रहा हूँ ...फिर भी तुमने देखा क्या..जूझ भले रहा हूँ लेकिन लड़ रहा हूँ..शायद इसीलिए यहाँ हूँ ...मैंने हिम्मत नही हारी ..धीरज नही खोया और ये विश्वास नही खोया कि सब ठीक होगा..सब हम ठीक कर लेंगे ....मैं जीत गया दोस्त..मुझे घाव तो लगे हैं...लेकिन तूफ़ान हारा है ..


मेरा यही अनुभव था दोस्त...लगे तो सीख लेना...और आने वाले को तुम भी बताना..कुछ नया जो तुम सीखना अपनी यात्रा से..आना यहीं मिलूंगा...ख्याल रखना "
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